ये निशा नहीं जाने वाली
सूरज आता अब भी नभ में
पर तिमिर नहीं जाता है अब
कितनी रातें हैं गुज़र गई
क्यूँ भोर नहीं होता है अब
मुझको लगता सूरज किरणें
अब यहाँ नहीं आने वाली
ये निशा....................
आशा बंधती है एक पल को
फिर तितर बितर सब हो जाता
सपना कोई जो देख लिया
निश्चय ही खंडित हो जाता
मुझको लगता इस ओर कभी
अब खुशी नहीं आने वाली
ये निशा....................
तुमको सब था मालूम मगर
फिर भी मुख तुमने फेर लिया
मेरे हिस्से जो था जीवन
सब धीरे-धीरे छीन लिया
मुझको लगता है अब कोयल
मधु गीत नहीं गाने वाली
ये निशा....................
सूरज आता अब भी नभ में
पर तिमिर नहीं जाता है अब
कितनी रातें हैं गुज़र गई
क्यूँ भोर नहीं होता है अब
मुझको लगता सूरज किरणें
अब यहाँ नहीं आने वाली
ये निशा....................
आशा बंधती है एक पल को
फिर तितर बितर सब हो जाता
सपना कोई जो देख लिया
निश्चय ही खंडित हो जाता
मुझको लगता इस ओर कभी
अब खुशी नहीं आने वाली
ये निशा....................
तुमको सब था मालूम मगर
फिर भी मुख तुमने फेर लिया
मेरे हिस्से जो था जीवन
सब धीरे-धीरे छीन लिया
मुझको लगता है अब कोयल
मधु गीत नहीं गाने वाली
ये निशा....................
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