सब कुछ लगता मुब्हम* सा है
तेरे जाने का ग़म सा है
जो मुमकिन हो तो रह जाओ
जाना तेरा मातम सा है
बस दुश्वारी दिखती इसमें
पथ तेरे बिन दुर्गम* सा है
जाने से तेरे इस घर का
हर एक कोना बरहम* सा है
हो फुरसत तो मुड़कर देखो
दश्तो आलम* पुरनम* सा है
ये जीवन तेरे बिन गोया
कुछ आधा है कुछ कम सा है
.................................................................................
१. मुब्हम - अस्पष्ट
२. दुर्गम - दुस्तर, विकट
३. बरहम - अस्त-व्यस्त
४. दश्तो आलम - दुनिया, संसार
५. पुरनम - गीला, भीगा
तेरे जाने का ग़म सा है
जो मुमकिन हो तो रह जाओ
जाना तेरा मातम सा है
बस दुश्वारी दिखती इसमें
पथ तेरे बिन दुर्गम* सा है
जाने से तेरे इस घर का
हर एक कोना बरहम* सा है
हो फुरसत तो मुड़कर देखो
दश्तो आलम* पुरनम* सा है
ये जीवन तेरे बिन गोया
कुछ आधा है कुछ कम सा है
.................................................................................
१. मुब्हम - अस्पष्ट
२. दुर्गम - दुस्तर, विकट
३. बरहम - अस्त-व्यस्त
४. दश्तो आलम - दुनिया, संसार
५. पुरनम - गीला, भीगा
No comments:
Post a Comment