वक़्त फ़ितरतन टिक कर नहीं रहता
आज वो तेरा है, तो कल मेरा भी होगा
हर रात के उस पार उजाला ही होता है
आज अँधेरा है, तो कल सवेरा भी होगा
आज जो मकां तुम्हे खंडहर सा दीखता है
वहीँ कल देखना लोगों का बसेरा भी होगा
गो उस पेड़ के क़िस्मत में आज सेहरा है
मगर कल वहीँ शादाब का डेरा भी होगा
आज वो तेरा है, तो कल मेरा भी होगा
हर रात के उस पार उजाला ही होता है
आज अँधेरा है, तो कल सवेरा भी होगा
आज जो मकां तुम्हे खंडहर सा दीखता है
वहीँ कल देखना लोगों का बसेरा भी होगा
गो उस पेड़ के क़िस्मत में आज सेहरा है
मगर कल वहीँ शादाब का डेरा भी होगा
behatarin aaj bhi vakt apka hai kal bhi vakt apka hi rahega
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