Sunday, September 23, 2012

काश ! कभी ऐसा भी होता

काश ! कभी ऐसा भी होता
तू भी मुझसे प्रीत निभाती
काश ! कभी ऐसा भी होता
तू भी मुझको पास बुलाती
काश ! कभी...................


तेरे मेरे सपने दोनों
कदम मिलाकर साथ में चलते
दृश्य बदलता वक़्त बदलता
पर न प्रेम के सूरज ढलते
मेरे उपवन के पुष्प-कुसुम
तेरे उपवन को भी महकाती
काश ! कभी...................


मेरे अंतर की पीड़ा
बनती तेरी भी करुण कहानी
तेरे मन का पुलकित होना
मेरे खुश होने की निशानी
मधुर गीत मेरे मन का
तेरे मन को झंकृत कर जाती
काश ! कभी...................

   

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