काव्यांजलि
Thursday, April 13, 2017
ज़िन्दगी
मैं इक ख़ौफ़नाक मौत था
और तुम इक मुक़म्मल ज़िन्दगी
तुमने मुझे गले लगाया
और मैं जी उठा
शायद पहली बार मौत,
ज़िन्दगी से
हार गई
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