Monday, April 3, 2017

कौन है ये?

कौन है ये जो
धीरे-धीरे, चुपके-चुपके
चोर क़दम से, बैठ गया है
पहलू मेरे,  सिरहाने में

कौन है ये जो
लगता है यूँ, देखके जिसको
मैं बागों में, खेलूँ फिर से
मैं बारिश में, भीगूँ फिर से

कौन है ये जो
लगता है यूँ, देखके जिसको
रात गुज़ारूँ, छत पर बैठे 
बेमतलब की, बातें करते 

कौन है ये जो
लगता है यूँ, देखके जिसको
मैं जीने लग जाऊँ फिर से
मैं नज़्में लिख जाऊँ फिर से
कौन है ये जो 

2 comments:

  1. Adorable ��
    You are one dextrous person of poems !��

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    1. Thanks a lot for these lovely words ! I am overwhelmed !

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