Sunday, May 13, 2012

माँ

सपने में जब भी मुझे घबराहट होती है ,
माँ के चले आने की तब-तब आहट होती है

हर ख़याल-ओ-एहसास में उसकी महक शामिल ,
इबादत सी होती है कभी आदत सी होती है 

हमेशा ही मिरे गम के ओ मेरे दरमयां यारों ,
मौजूद फासले सी उसकी मूरत होती है 

बिन उसके हर इक शय रूठी सी हो जैसे ,
हर मोड़ पे गोया उसकी ज़रुरत होती है 

दुनिया में हर कोई भले ही छोड़ दे तन्हा ,
हमेशा साथ, उसके प्यार की इनायत होती है    

1 comment:

  1. pahli aur aakri do panktiyaan mere hisaab se rooh hai is ki... bahut achcha prayaash...

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