यूँ तो कई लोग मिरे आसपास हैं ,
जो तिरा साथ होता, तो और बात होती
कई लोग जश्न में शामिल तो हैं मगर ,
जो तूं शरीक होता, तो और बात होती
वैसे हैं कम नहीं मिरे भी ग़मगुसार* ,
पर तूं जो बाँट लेता, तो और बात होती
मुझको सँभालने को उठे कई हाथ हैं ,
जो तिरा हाथ होता, तो और बात होती
रूठने पे लोग यूँ मनाने आये हैं ,
जो तूं मनाने आती, तो और बात होती
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ग़मगुसार - ग़म दूर करने वाला
Ahle zabaan to hain bohut koi nahin ahle dil
ReplyDeleteKaun teri tarah 'Hafeez' dard ke geet ga sake
- 'Hafeez Jalandhari'
Shukriya kehta hoon..
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