न मैं आया न तुम आये, ये वर्तमान फिर बीत गया
कुछ टूट गए कुछ तोड़े गए, ये पुष्प्वृक्ष फिर रीत* गया
न मैंने कहा न तुमने सुना, ये नीरवता* फिर जीत गया
न स्वर ही रहा न राग बचा, फिर व्यर्थ ही ये उद्गीत* गया
जिसने भी दिया बस छल ही दिया, न मुख कोई निर्लिप्त* गया
मैं भी पा लेता प्रेम मगर, ये भी वांछन* अतृप्त गया
जो स्वप्न बुने वो टूट गए, न शौक कोई परितृप्त* गया
जिसको चाहा वो छूट गए, न दीप कोई संदीप्त* गया
न आस कोई परिहास* कोई, अब निज भरोस भी टूट गया
फिर क्यूँ गाऊं मन बहलाऊं, जब साज ह्रदय का छूट गया
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रीत - खाली होना
नीरवता - निशब्दता
उद्गीत - उचें स्वर में गया हुआ गाना
निर्लिप्त - बिना लेप चढ़ाया हुआ
वांछन - इच्छा
परितृप्त - अच्छी तरह संतुष्ट
संदीप्त - जला हुआ
परिहास - हास्य,विनोद
न आस कोई परिहास* कोई, अब निज भरोस भी टूट गया
फिर क्यूँ गाऊं मन बहलाऊं, जब साज ह्रदय का छूट गया
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रीत - खाली होना
नीरवता - निशब्दता
उद्गीत - उचें स्वर में गया हुआ गाना
निर्लिप्त - बिना लेप चढ़ाया हुआ
वांछन - इच्छा
परितृप्त - अच्छी तरह संतुष्ट
संदीप्त - जला हुआ
परिहास - हास्य,विनोद
this "kabita" recall the rhythmic dream of peacock dance .......
ReplyDeleteThanku !!
Deleteaisa kaha jaata hai ki prakriti laakhon me se kisi ek ko hi maika deti hai apne pyaar ko paane ka, jo paa lete hain unki pyaar ki gunj unke duniya se jaane ke bewajood amar ho jaati hai magar tumhari in panktiyon ne pyaar na pa sakne waale ke antardhwani ko amar sa kar diya...
ReplyDeleteबहुत-२ धन्यवाद !!
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