रात वीरानी थी और घर भी था अकेला
किसकी सदा* ने छुपके मेरे दिल को था छेड़ा
आह हम भरते रहे,पलकें भी नम होती रहीं
किसका था जाने रात भर यादों का वह मेला
पल वहीँ ठहरा रहा था, धड़कने थी मुंजमिद*
किसका था जाने देन गमगीं* अजनबी बेला
आशुफ़्तगी* सा मन में था और बदन में ज़लज़ला*
किसका था जाने रूह जिसने मुझको टटोला
संकेत कोई था या यह भ्रम था बता दे ऐ खुदा
पहले भी घर था तन्हा और अब भी है अकेला
-----------------------------------------------------------------------------------
सदा -- आवाज़
मुंजमिद -- स्थिर, रुका हुआ
गमगीं -- दुखी
आशुफ़्तगी -- घबराहट
ज़लज़ला -- कम्पन, भूकंप
किसकी सदा* ने छुपके मेरे दिल को था छेड़ा
आह हम भरते रहे,पलकें भी नम होती रहीं
किसका था जाने रात भर यादों का वह मेला
पल वहीँ ठहरा रहा था, धड़कने थी मुंजमिद*
किसका था जाने देन गमगीं* अजनबी बेला
आशुफ़्तगी* सा मन में था और बदन में ज़लज़ला*
किसका था जाने रूह जिसने मुझको टटोला
संकेत कोई था या यह भ्रम था बता दे ऐ खुदा
पहले भी घर था तन्हा और अब भी है अकेला
-----------------------------------------------------------------------------------
सदा -- आवाज़
मुंजमिद -- स्थिर, रुका हुआ
गमगीं -- दुखी
आशुफ़्तगी -- घबराहट
ज़लज़ला -- कम्पन, भूकंप
aapka ada aapka phchan dilatehai
ReplyDelete