कविता को सबसे परिस्कृत साहित्यिक विधा माना गया है....अतः इसमें प्रवेश करने पर फिसलन का डर रहता ही है क्यूंकि ऊंचाई जितनी हो गिरने का भय और प्रभाव उसी अनुपात में होता है.....
"की अगले ही कदम पे खाइयाँ हैं,
बहुत अभिशप्त ये ऊंचाईयां हैं"...(शिव ॐ अम्बर)
अतः आपसे यह अनुरोध है की आप लोग अपना बहुमूल्य सुझाव तथा टिप्पणियों से मार्गदर्शन करते रहे.....
No comments:
Post a Comment