Sunday, November 28, 2010

साक्षात्कार

मुझे अपनी कवितायेँ प्रविष्ट करने से पूर्व भावी पाठकों से साक्षात्कार करने की इच्छा हुई.......इस ब्लॉग के माध्यम से मैं अपने कुछ विचारों को प्रस्तुत करना चाहता हूँ जो कलम की नींव से उतरकर कविता के रूप में स्थिर हैं......इसका आरम्भ विचारपूर्ण ढंग से नहीं हुआ अपितु विचारों के सैलाब ने इसे अभिव्यक्त करने को बाध्य कर दिया......

कविता को सबसे परिस्कृत साहित्यिक विधा माना गया है....अतः इसमें प्रवेश करने पर फिसलन का डर रहता ही है क्यूंकि ऊंचाई जितनी हो गिरने का भय और प्रभाव उसी अनुपात में होता है.....
                                 "की अगले ही कदम पे खाइयाँ हैं,
                 बहुत अभिशप्त ये ऊंचाईयां हैं"...(शिव ॐ अम्बर)       

अतः आपसे यह अनुरोध है की आप लोग अपना बहुमूल्य सुझाव तथा टिप्पणियों से मार्गदर्शन करते रहे.....  

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