Tuesday, September 10, 2024

नई उम्मीद लेकर...

नई उम्मीद लेकर, फिर निकल रहा था मैं

कदम तो डगमगाए, पर सम्भल रहा था मैं

कैसी ये राह जिसमें, अनगिन चुनौतियां थी

मन में हौसला था, बस और चल रहा था मैं


                    हाथों में हाथ थामे, साथ चल रहा था जब

                    हसीन स्वप्न मेरे, मन में पल रहा था जब

                    एक आंधी आई सहसा, सब कुछ बिखर गया था

                    होश में नहीं था, मौसम बदल रहा था जब


वो साथ मेरे चलकर, अब तो थक गया होगा

हालात भी थे ऐसे, कि वो ठिठक गया होगा

मैं जानता हूं लेकिन, वो चाहता था आना

मोड़ पर कोई वो, रस्ता भटक गया होगा


                    सूनी वो राह है अब, जिसपे चल रहा हूं मैं

                    मिथ्या ये खोज है पर, मन को छल रहा हूं मैं

                    जिस वक्त था ठहराना, उस वक्त मुड़ गया वो

                    दीप हसरतों का, आशा से जल रहा हूं मैं

Friday, January 12, 2024

जीवन-३

हरदम दिशा बदलता रहता 
सरिता जैसा बहता जीवन 


किसी समय लगता है आसां 
किसी समय लगता मुश्किल भी 
सफर निरंतर चलते जाना
मिलता इसका क्या साहिल भी
कभी सघन निर्जन वन लगता
कभी कुसुम सा खिलता जीवन
हरदम दिशा बदलता रहता 
सरिता जैसा.....................


                पत्थर, रोड़े, कंकड़ मिलते
                पथ को दुर्गम करने वाले
                पर आशाएँ भी राहों में
                नई रवानी भरने वाले 
                गिरते उठते चलते जाना
                चलता रहता है आजीवन
                हरदम दिशा बदलता रहता 
                सरिता जैसा.....................


तपती गर्मी, सूखा मौसम
जब प्रवाह को बाधित करता 
झम झम करती बारिश आकर
नव ऊर्जा संचारित करता 
गर्मी के पश्चात हमेशा
बारिश लेकर आता सावान
हरदम दिशा बदलता रहता 
सरिता जैसा.....................


                छोटे-छोटे कदम बढ़ाकर
                लंबी यात्रा पर चलता है
                मीठे-तीखे अनुभव चुनता 
                चट्टानों से भी लड़ता है
                सरिता जैसे सिंधु में मिलती 
                वैसे मृत्यु में मिलता जीवन
                हरदम दिशा बदलता रहता 
                सरिता जैसा.....................