Wednesday, December 18, 2013

ग़ज़ल

ये *सजल नयन और तुम,
उपटा उपवन और तुम 

खोया चंदा, डूबे तारे,
रूठा सा गगन और तुम 

प्रात काल, तेरा ख़याल
अलसाया मन और तुम 

टूटी माला, बिखरे मोती
सपना *भंजन और तुम 

खाली कमरे, तन्हा *प्रहरें
सूना आँगन और तुम 

काली रातें, बेनूर सुबह  
नीरस जीवन और तुम 


............................................................................
*सजल - जल सहित 
*भंजन - टूटना 
*प्रहरें   - समय 





3 comments: