कोई
बेरहम,बेपरवाह,बेतकल्लुफ*
हवा का झोंका
तेरी यादों के
तिनके उड़ा लाया था कभी
वो तिनका
अब तलक फँसा है
आँखों में
और
हर इक पल
टीसता है
सालता है
चुभता है मुझे
और
अब ये डर है
कि इससे निकलने वाले
अश्क
तुम्हारे घर में
सैलाब न ले आएं
कभी
....................................................................
बेतकल्लुफ* - निस्संकोच
बेरहम,बेपरवाह,बेतकल्लुफ*
हवा का झोंका
तेरी यादों के
तिनके उड़ा लाया था कभी
वो तिनका
अब तलक फँसा है
आँखों में
और
हर इक पल
टीसता है
सालता है
चुभता है मुझे
और
अब ये डर है
कि इससे निकलने वाले
अश्क
तुम्हारे घर में
सैलाब न ले आएं
कभी
....................................................................
बेतकल्लुफ* - निस्संकोच
निःसंकोच यह एक मर्मस्पर्शी रचना है। कोटि- कोटि बधाई। आप ऐसे ही लिखते रहे।
ReplyDeleteधन्यवाद कहता हूँ...
ReplyDeletegud one bro....keet it up
ReplyDeleteबहुत-२ शुक्रिया...
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