Thursday, January 19, 2012

निरस्त उत्सव

नया वर्ष है,नयी सुबह है
पर मेरे आँखों में पानी 
मेरी बातें वही पुरानी 

क्या बदला इस नए वर्ष में 
जो मैं इसका जश्न मनाऊँ,
मेरा हिस्सा कहाँ हर्ष में 
जो मैं भी शामिल हो जाऊँ,
सबके वक़्त बदलते होंगे 
मेरी रहती वही कहानी 
मेरी बातें................


क्या पाया इस नए साल में
जो मैं भी इस पर इठलाऊँ,
क्या है अंतर मेरे हाल में 
जो मैं गीत ख़ुशी का गाऊँ,
आया होगा सूरज सब घर 
पर तम की मुझपर मनमानी 
मेरी बातें................  







2 comments:

  1. खुबसूरत प्रयास है, साधुवाद.
    बहुत तीक्ष्ण दृष्टि पायी है...प्रयास जारी रखें

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