मुझे नहीं पहचान सका है
जब तक मन था गले लगाया
दिन विपरीत हुआ ठुकराया
मेरे अन्तर की अथाह प्रियता* को पर न छान सका है
मुझे नहीं पहचान सका है
प्रणय* गीत मुझको सिखलाया
हँसकर मेरा मन बहलाया
मेरे अन्तर की चोटिल पीड़ा को पर न जान सका है
मुझे नहीं पहचान सका है
सघन धुंध और कोहरा छाया
पल-पल मेरा जी घबराया
इस विपरीत घड़ी में अपना मुझे न कोई मान सका सका है
मुझे नहीं पहचान सका है
...............................................……
प्रियता* - प्रेम का भाव
प्रणय* - प्रेम
जब तक मन था गले लगाया
दिन विपरीत हुआ ठुकराया
मेरे अन्तर की अथाह प्रियता* को पर न छान सका है
मुझे नहीं पहचान सका है
प्रणय* गीत मुझको सिखलाया
हँसकर मेरा मन बहलाया
मेरे अन्तर की चोटिल पीड़ा को पर न जान सका है
मुझे नहीं पहचान सका है
सघन धुंध और कोहरा छाया
पल-पल मेरा जी घबराया
इस विपरीत घड़ी में अपना मुझे न कोई मान सका सका है
मुझे नहीं पहचान सका है
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प्रियता* - प्रेम का भाव
प्रणय* - प्रेम