सोचेंगे तुम्हें वोट, करें कि नहीं
कि अबसे सपोट, करें कि नहीं
चौदह में था लाया तुमको, फिरसे था जिताया तुमको
हमारी मगर क्यूं कोई, कदर ही नहीं
सोचेंगे तुम्हें वोट करें कि नहीं
कि अबसे सपोट.....................
तुम आए थे सपने थे जगे
अच्छे दिन के वादे थे किए
वापस होगा काला धन, किसान का दुगना इनकम
सबका पक्का घर होगा, अब स्मार्ट शहर होगा
वादे हैं तोड़े तुमने, ओ बेरहम, ओ बेरहम
सोचेंगे तुम्हें वोट करें कि नहीं
कि अबसे सपोट.....................
तुमने आते "डीमो" ला दिया
ईडी दम पर क्या क्या ना किया
आरटीआई तड़प रहा, डेटा अब निजी ना रहा
पर्यावरण कानून दफ़न, लाए कितने संशोधन
सीना है चौड़ा कितना, दिल पर है कम, दिल पर है कम
सोचेंगे तुम्हें वोट करें कि नहीं
कि अबसे सपोट
.....................
No comments:
Post a Comment